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पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल ने चौंकाया, कांग्रेस को बड़ी राजनीतिक वापसी के संकेत

Satyakhabarindia

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल 2026 को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। इसके तुरंत बाद सामने आए पोल डायरी के एग्जिट पोल ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। सर्वे के अनुसार कांग्रेस को इस बार 3 से 5 सीटों तक का फायदा मिलता दिख रहा है, जो पिछले चुनाव की तुलना में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 2021 में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, ऐसे में यह संभावित वापसी राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बन गई है। वहीं इस सर्वे ने मुकाबले को और अधिक त्रिकोणीय और अनिश्चित बना दिया है।

टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला

पोल डायरी के अनुमान के अनुसार ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस यानी TMC को 127 सीटें मिलने का अनुमान है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी को 171 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है। यह आंकड़ा बताता है कि इस बार राज्य में सत्ता की लड़ाई बेहद करीबी और तेज हो सकती है। 2021 के मुकाबले बीजेपी के प्रदर्शन में सुधार देखा जा रहा है, जहां पार्टी 71 सीटों तक सीमित रह गई थी। इस बार के रुझान से साफ है कि मतदाताओं के बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और किसी भी पार्टी के लिए जीत आसान नहीं दिख रही।

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लेफ्ट और अन्य दलों की सीमित मौजूदगी

पोल डायरी सर्वे में लेफ्ट फ्रंट को केवल 3 सीटों पर जीत का अनुमान दिया गया है, जबकि अन्य दलों को 1 सीट मिलती दिख रही है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बंगाल की राजनीति में मुख्य मुकाबला अब भी टीएमसी और बीजेपी के बीच ही केंद्रित है। हालांकि कांग्रेस की संभावित वापसी ने राजनीतिक समीकरणों में नई दिलचस्पी जोड़ दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे दलों की सीमित मौजूदगी इस चुनाव को और अधिक द्विध्रुवीय बना रही है, जिससे मुख्य मुकाबला और तीखा हो गया है।

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रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाया राजनीतिक उत्साह

निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो स्वतंत्रता के बाद सबसे अधिक है। पहले चरण में 93.19 प्रतिशत और दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत मतदान हुआ। महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही, जिससे लोकतंत्र के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है। कुल 6.81 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। यह रिकॉर्ड वोटिंग इस बात का संकेत देती है कि मतदाता इस बार बदलाव या स्थिरता को लेकर बेहद सक्रिय और जागरूक रहे हैं।

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